श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.187.10 
यत्र खं तत्र पवनस्तत्राग्निर्यत्र मारुत:।
अमूर्तयस्ते विज्ञेया मूर्तिमन्त: शरीरिणाम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जहाँ आकाश है, वहाँ वायु है और जहाँ वायु है, वहाँ अग्नि भी है। यद्यपि ये तीनों तत्व निराकार हैं, फिर भी ये जीवों के शरीर में विद्यमान हैं और मूर्ति के समान माने जाते हैं। 10॥
 
Where there is sky, there exists air and where there is air, there also exists fire. Although these three elements are formless, yet they are present in the bodies of living beings and are considered as idols. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)