भृगुरुवाच
न प्रणाशोऽस्ति जीवस्य दत्तस्य च कृतस्य च।
याति देहान्तरं प्राणी शरीरं तु विशीर्यते॥ १॥
अनुवाद
भृगुजी बोले- ब्रह्मन्! आत्मा तथा उसके द्वारा दिए गए दान और उसके द्वारा किए गए कर्म कभी नष्ट नहीं होते। आत्मा दूसरे शरीर में चली जाती है, केवल उसके द्वारा छोड़ा गया शरीर ही यहाँ नष्ट हो जाता है॥1॥
Bhriguji said-Brahman! The soul and the gifts given by it and the deeds performed by it are never destroyed. The soul goes into another body, only the body left by it gets destroyed here.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥