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mahabharat 12.186.9: ज्वर, घाव आदि रोगों तथा अन्य प्रकार के कष्टों के कारण शरीर का पृथ्वी तत्व क्षीण हो जाता है। यदि इन पाँच तत्वों में से किसी एक को भी हानि पहुँचती है, तो उसका सारा प्रभाव पंचतत्वों को प्राप्त हो जाता है। 9॥   |   mahabharat अध्याय 12.186: जीवकी सत्तापर नाना प्रकारकी युक्तियोंसे शंका उपस्थित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 186: जीवकी सत्तापर नाना प्रकारकी युक्तियोंसे शंका उपस्थित करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.186.9 
व्याधिव्रणपरिक्लेशैर्मेदिनी चैव शीर्यते।
पीडितेऽन्यतरे ह्येषां संघातो याति पञ्चधा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ज्वर, घाव आदि रोगों तथा अन्य प्रकार के कष्टों के कारण शरीर का पृथ्वी तत्व क्षीण हो जाता है। यदि इन पाँच तत्वों में से किसी एक को भी हानि पहुँचती है, तो उसका सारा प्रभाव पंचतत्वों को प्राप्त हो जाता है। 9॥
 
The earth element of the body gets disintegrated due to diseases like fever, wounds and other types of troubles. If even one of these five elements gets harmed, then all their impact is received by the Panchatatva. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)