पूर्वकाल में केवल बीजों की ही उत्पत्ति हुई थी, जिनके कारण यह संसार चलता रहता है। जो मरते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं, परन्तु बीजों से बीज उत्पन्न होते रहते हैं॥15॥
In the past, only seeds were created, due to which this world continues to exist. Those who die, they get destroyed, but seeds keep on being produced from seeds.॥ 15॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि जीवस्वरूपाक्षेपे षडशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें जीवके स्वरूपपर आक्षेपविषयक एक सौ छियासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)