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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 186: जीवकी सत्तापर नाना प्रकारकी युक्तियोंसे शंका उपस्थित करना
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श्लोक 14
श्लोक
12.186.14
छिन्नस्य यदि वृक्षस्य न मूलं प्रतिरोहति।
बीजान्यस्य प्रवर्तन्ते मृत: क्व पुनरेष्यति॥ १४॥
अनुवाद
यदि जड़ से कटी हुई वृक्ष की जड़ ही पुनः नहीं उगती, केवल उसके बीज ही अंकुरित होते हैं, तो मरा हुआ मनुष्य पुनः कहाँ से आएगा? ॥14॥
If the root of a tree cut off from its roots does not sprout again, only its seeds germinate, then where will a dead person come again from? ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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