Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.186.1: भारद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! यदि वायु ही प्राणी को जीवित रखती है, वायु ही शरीर को क्रियाशील बनाती है, वायु ही श्वास लेती है और वायु ही बोलती है, तो फिर इस शरीर में आत्मा का अस्तित्व मानना व्यर्थ है॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.186: जीवकी सत्तापर नाना प्रकारकी युक्तियोंसे शंका उपस्थित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भारद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! यदि वायु ही प्राणी को जीवित रखती है, वायु ही शरीर को क्रियाशील बनाती है, वायु ही श्वास लेती है और वायु ही बोलती है, तो फिर इस शरीर में आत्मा का अस्तित्व मानना व्यर्थ है॥1॥
Bharadwaj asked - O Lord! If it is air that keeps a creature alive, it is air that makes the body active, it is air that breathes and it is air that speaks, then it is futile to accept the existence of a soul in this body.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥