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mahabharat 12.185.4: प्राण से संयुक्त आत्मा ही जीव है, समस्त प्राणियों की आत्मा सनातन पुरुष है। वही मन, बुद्धि, अहंकार, पंचभूत और विषयों का स्वरूप है। ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.185: शरीरके भीतर जठरानल तथा प्राण-अपान आदि वायुओंकी स्थिति आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 185: शरीरके भीतर जठरानल तथा प्राण-अपान आदि वायुओंकी स्थिति आदिका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.185.4 
स जन्तु: सर्वभूतात्मा पुरुष: स सनातन:।
मनो बुद्धिरहङ्कारो भूतानि विषयश्च स:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्राण से संयुक्त आत्मा ही जीव है, समस्त प्राणियों की आत्मा सनातन पुरुष है। वही मन, बुद्धि, अहंकार, पंचभूत और विषयों का स्वरूप है। ॥4॥
 
The soul united with life is the living being, the soul of all beings is the eternal man. He is the mind, intellect, ego, the five elements and the form of objects. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)