Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.185.15: हृदय से ही समस्त प्राण वायुएँ इधर-उधर तथा ऊपर-नीचे चलती हैं; अतः दस प्राणों द्वारा परिचालित समस्त नाड़ियाँ अन्न का रस ले जाती हैं ॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.185: शरीरके भीतर जठरानल तथा प्राण-अपान आदि वायुओंकी स्थिति आदिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रस्थिता हृदयात् सर्वे तिर्यगूर्ध्वमधस्तथा।
वहन्त्यन्नरसान् नाडॺो दश प्राणप्रचोदिता:॥ १५॥
अनुवाद
हृदय से ही समस्त प्राण वायुएँ इधर-उधर तथा ऊपर-नीचे चलती हैं; अतः दस प्राणों द्वारा परिचालित समस्त नाड़ियाँ अन्न का रस ले जाती हैं ॥15॥
All the vital airs move here and there and up and down from the heart; hence, all the nerves, circulated by the ten vital airs, carry the juice of the food. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥