न शृण्वन्ति न पश्यन्ति न गन्धरसवेदिन:।
न च स्पर्शं विजानन्ति ते कथं पाञ्चभौतिका:॥ ८॥
अनुवाद
वे न सुनते हैं, न देखते हैं, न गंध और स्वाद का अनुभव करते हैं और न ही उन्हें स्पर्श का ज्ञान है; फिर वे पंचभौतिक कैसे कहे जा सकते हैं?॥8॥
They neither hear nor see nor experience smell and taste nor do they have the knowledge of touch; then how can they be called Panchabhutik (five elements)?॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥