श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.184.42 
एवं बहुविधाकार: शब्द आकाशसम्भव:।
आकाशजं शब्दमाहुरेभिर्वायुगुणै: सह॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार आकाश से उत्पन्न शब्द के अनेक भेद हैं। वायु से संबंधित गुणों के साथ आकाश-जनित शब्द भी है; ऐसा विद्वान पुरुष कहते हैं ॥42॥
 
Thus, there are many variations of the word born from the sky. Along with the qualities related to air, there is the word akasha-born; This is what learned men say. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)