एष षड्विधविस्तारो रसो वारिमय: स्मृत:।
शब्द: स्पर्शश्च रूपं च त्रिगुणं ज्योतिरुच्यते॥ ३२॥
ज्योति: पश्यति रूपाणि रूपं च बहुधा स्मृतम्।
अनुवाद
शब्द, स्पर्श और रूप - ये अग्नि के तीन गुण कहे गए हैं। ज्योतिर्मय नेत्र रूप को देखते हैं। अग्नि का प्रधान गुण रूप भी अनेक प्रकार का माना गया है। ॥32 1/2॥
Sound, touch and form—these are said to be the three qualities of Agni. The luminous eyes see the form. The form, the main quality of Agni, is also considered to be of many types. ॥ 32 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥