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mahabharat 12.184.22: कान, नासिका, मुख, हृदय और उदर, ये प्राणियों के शरीर में स्थित पाँच धातु के छिद्र आकाश से उत्पन्न हुए हैं -॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.184.22 
श्रोत्रं घ्राणं तथाऽऽस्यं च हृदयं कोष्ठमेव च।
आकाशात् प्राणिनामेते शरीरे पञ्च धातव:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कान, नासिका, मुख, हृदय और उदर, ये प्राणियों के शरीर में स्थित पाँच धातु के छिद्र आकाश से उत्पन्न हुए हैं -॥22॥
 
Ear, nostril, mouth, heart and abdomen, these five metallic hollows in the bodies of living beings have arisen from the sky -॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)