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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन
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श्लोक 2
श्लोक
12.184.2
यदासृजत् सहस्राणि भूतानां स महामति:।
पञ्चानामेव भूतत्वं कथं समुपपद्यते॥ २॥
अनुवाद
परंतु जब सर्वज्ञ ब्रह्मा ने अन्य हजारों तत्त्वों की रचना की है, तब केवल इन पाँच तत्त्वों को 'तत्त्व' कहना कहाँ तक युक्तिसंगत है? ॥2॥
But when the all-wise Brahma has created thousands of other elements, to what extent is it logical to call only these five elements as 'elements'? ॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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