श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.184.19 
जङ्गमानां च सर्वेषां शरीरे पञ्च धातव:।
प्रत्येकश: प्रभिद्यन्ते यै: शरीरं विचेष्टते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सभी प्राणियों के शरीर में भी पंचतत्व विद्यमान रहते हैं; परन्तु उनके स्वरूप में अन्तर होता है। इन्हीं पंचतत्वों के सहयोग से शरीर क्रियाशील होता है॥19॥
 
The five elements are also present in the bodies of all living beings; but there is a difference in their form. It is with the cooperation of these five elements that the body becomes active.॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)