श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.184.18 
तेन तज्जलमादत्तं जरयत्यग्निमारुतौ।
आहारपरिणामाच्च स्नेहो वृद्धिश्च जायते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वृक्ष अपनी जड़ों से जो जल खींचता है, उसे उसके भीतर स्थित वायु और अग्नि पचा लेते हैं। जब भोजन पच जाता है, तब वृक्ष कोमल होकर बढ़ते हैं।॥18॥
 
The water that the tree draws from its roots is digested by the air and fire present inside it. When the food is digested, the trees become soft and grow.॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)