श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.184.10 
भृगुरुवाच
घनानामपि वृक्षाणामाकाशोऽस्ति न संशय:।
तेषां पुष्पफलव्यक्तिर्नित्यं समुपपद्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भृगु जी बोले- मुनि! यद्यपि वृक्ष ठोस प्रतीत होते हैं, फिर भी उनमें स्थान होने में संदेह नहीं है। यही कारण है कि उनमें प्रतिदिन फल-फूल आदि उगते रहते हैं॥10॥
 
Bhrigu Ji said- Muni! Although trees appear to be solid, there is no doubt that there is space in them. This is the reason why fruits and flowers etc. can grow in them every day.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)