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mahabharat 12.184.1: भरद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! संसार में ये पाँच धातुएँ 'महाभूत' कहलाती हैं, जिनकी सृष्टि के आदि में ब्रह्मा ने रचना की थी। ये ही इन समस्त लोकों में व्याप्त हैं। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.184.1 
भरद्वाज उवाच
त एते धातव: पञ्च ब्रह्मा यानसृजत् पुरा।
आवृता यैरिमे लोका महाभूताभिसंज्ञिता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भरद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! संसार में ये पाँच धातुएँ 'महाभूत' कहलाती हैं, जिनकी सृष्टि के आदि में ब्रह्मा ने रचना की थी। ये ही इन समस्त लोकों में व्याप्त हैं। 1॥
 
Bharadwaja asked – Lord! In the world, these five metals are called 'Mahabhoota', which were created by Brahma in the beginning of the universe. These are the ones who are prevalent in all these worlds. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)