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mahabharat 12.183.7: वे ब्रह्मर्षि अन्न त्यागकर, केवल वायु पर निर्वाह करते हुए, मौन अवस्था में शरण लेकर, एक सौ दिव्य वर्षों तक ध्यानस्थ होकर बैठे रहे।   |   mahabharat अध्याय 12.183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.183.7 
तेऽतिष्ठन् ध्यानमालम्ब्य मौनमास्थाय निश्चला:।
त्यक्ताहारा: पवनपा दिव्यं वर्षशतं द्विजा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे ब्रह्मर्षि अन्न त्यागकर, केवल वायु पर निर्वाह करते हुए, मौन अवस्था में शरण लेकर, एक सौ दिव्य वर्षों तक ध्यानस्थ होकर बैठे रहे।
 
That Brahmarshi, giving up food and living only on air, sat motionless and meditating, taking refuge in silence for a hundred divine years. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)