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mahabharat 12.183.17: इस पृथ्वी को समस्त रस, गंध, स्नेह और प्राणियों का कारण समझना चाहिए। इसी से सबकी उत्पत्ति होती है। 17॥   |   mahabharat अध्याय 12.183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.183.17 
रसानां सर्वगन्धानां स्नेहानां प्राणिनां तथा।
भूमिर्योनिरिह ज्ञेया यस्यां सर्वं प्रसूयते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी को समस्त रस, गंध, स्नेह और प्राणियों का कारण समझना चाहिए। इसी से सबकी उत्पत्ति होती है। 17॥
 
‘This earth should be considered the cause of all tastes, smells, affections and living beings. From this everything originates. 17॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भृगुभरद्वाजसंवादे मानसभूतोत्पत्तिकथने त्र्यशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भृगु और भरद्वाजसंवादके प्रसंगमें मानसभूतोंकी उत्पत्तिका वर्णनविषयक एक सौ तिरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)