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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.183.1 
भरद्वाज उवाच
प्रजाविसर्गं विविधं कथं स सृजते प्रभु:।
मेरुमध्ये स्थितो ब्रह्मा तद् ब्रूहि द्विजसत्तम॥ १॥
 
 
अनुवाद
भरद्वाज ने पूछा - द्विजश्रेष्ठ! यह बताओ कि भगवान ब्रह्मा मेरु पर्वत के मध्य में स्थित होकर किस प्रकार नाना प्रकार के लोगों की सृष्टि करते हैं?॥1॥
 
Bharadwaj asked – Dwijashreshtha! Tell me how Lord Brahma, being situated in the center of Mount Meru, creates various types of people? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)