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mahabharat 12.182.6: कैलाश पर्वत की चोटी पर बैठे हुए महाबली भृगु को अपने तेज से प्रकाशित होते देख, ऋषि भारद्वाज ने पूछा:   |   mahabharat अध्याय 12.182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.182.6 
कैलासशिखरे दृष्ट्वा दीप्यमानं महौजसम्।
भृगुं महर्षिमासीनं भरद्वाजोऽन्वपृच्छत॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कैलाश पर्वत की चोटी पर बैठे हुए महाबली भृगु को अपने तेज से प्रकाशित होते देख, ऋषि भारद्वाज ने पूछा:
 
Seeing the mighty sage Bhrigu sitting on the peak of Mount Kailash, radiating with his own brilliance, sage Bharadwaj asked:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)