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mahabharat 12.182.38: इस कमल का केंद्र मेरु पर्वत है, जो आकाश में बहुत ऊँचा है। उसी पर्वत के केंद्र में बैठकर भगवान ब्रह्मा समस्त लोकों की रचना करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.182.38 
कर्णिका तस्य पद्मस्य मेरुर्गगनमुच्छ्रित:।
तस्य मध्ये स्थितो लोकान् सृजते जगत: प्रभु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इस कमल का केंद्र मेरु पर्वत है, जो आकाश में बहुत ऊँचा है। उसी पर्वत के केंद्र में बैठकर भगवान ब्रह्मा समस्त लोकों की रचना करते हैं।
 
The centre of this lotus is Mount Meru, which is very high in the sky. Sitting in the centre of that mountain, Lord Brahma creates all the worlds.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भृगुभरद्वाजसंवादे द्वॺशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भृगु और भरद्वाजका संवादविषयक एक सौ बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ४० श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)