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mahabharat 12.182.27: पृथ्वी के अंत में समुद्र है। समुद्र के अंत में घोर अंधकार है। अंधकार के अंत में जल है और जल के अंत में अग्नि की स्थिति कही गई है।॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.182.27 
पृथिव्यन्ते समुद्रास्तु समुद्रान्ते तम: स्मृतम्।
तमसोऽन्ते जलं प्राहुर्जलस्यान्तेऽग्निरेव च॥ २७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी के अंत में समुद्र है। समुद्र के अंत में घोर अंधकार है। अंधकार के अंत में जल है और जल के अंत में अग्नि की स्थिति कही गई है।॥27॥
 
At the end of the earth is the ocean. At the end of the ocean is pitch dark. At the end of the darkness is water and at the end of water is said to be the state of fire.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)