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mahabharat 12.182.20: वे स्वयंभू भगवान विष्णु हैं, जो अनंत नाम से प्रसिद्ध हैं। वे सभी प्राणियों के हृदय में अंतर्यामी रूप में विद्यमान हैं। जिनका हृदय शुद्ध नहीं है, उनके लिए उनके वास्तविक स्वरूप को जानना अत्यंत कठिन है।   |   mahabharat अध्याय 12.182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.182.20 
स एष भगवान् विष्णुरनन्त इति विश्रुत:।
सर्वभूतात्मभूतस्थो दुर्विज्ञेयोऽकृतात्मभि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वे स्वयंभू भगवान विष्णु हैं, जो अनंत नाम से प्रसिद्ध हैं। वे सभी प्राणियों के हृदय में अंतर्यामी रूप में विद्यमान हैं। जिनका हृदय शुद्ध नहीं है, उनके लिए उनके वास्तविक स्वरूप को जानना अत्यंत कठिन है।
 
That self-existent God is Vishnu, who is famous by the name Ananta. He is present in the hearts of all beings as the inner self. It is very difficult for those whose hearts are not pure to know His true nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)