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mahabharat 12.182.17: पहाड़ उसकी हड्डियाँ हैं, धरती उसकी चर्बी और मांस है। सागर उसका खून है और आकाश उसका पेट है।   |   mahabharat अध्याय 12.182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.182.17 
शैलास्तस्यास्थिसंज्ञास्तु मेदो मांसं च मेदिनी।
समुद्रास्तस्य रुधिरमाकाशमुदरं तथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पहाड़ उसकी हड्डियाँ हैं, धरती उसकी चर्बी और मांस है। सागर उसका खून है और आकाश उसका पेट है।
 
The mountains are his bones, the earth is his fat and flesh. The ocean is his blood and the sky is his stomach.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)