श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.182.16 
अहंकार इति ख्यात: सर्वभूतात्मभूतकृत्।
ब्रह्मा वै स महातेजा य एते पञ्च धातव:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वे अहंकार नाम से भी विख्यात हैं और समस्त प्राणियों के आत्मा तथा उन प्राणियों के रचयिता हैं। वे महाबली ब्रह्मा इन पंचमहाभूतों के रूप में प्रकट हुए हैं॥16॥
 
He is also known by the name of Ahamkara and is the soul of all beings and the creator of those beings. The mighty Brahma has appeared in the form of these five great elements.॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)