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mahabharat 12.182.13: उन स्वयंभू देव ने पहले महातत्त्व (व्यापक बुद्धि) की रचना की। फिर उस महातत्त्व के रूप में भगवान ने अहंकार (संयुक्त अहंकार) की रचना की। 13॥   |   mahabharat अध्याय 12.182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.182.13 
सोऽसृजत् प्रथमं देवो महान्तं नाम नामत:।
महान् ससर्जाहंकारं स चापि भगवानथ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन स्वयंभू देव ने पहले महातत्त्व (व्यापक बुद्धि) की रचना की। फिर उस महातत्त्व के रूप में भगवान ने अहंकार (संयुक्त अहंकार) की रचना की। 13॥
 
That Swayambhu Dev first created Mahatattva (comprehensive intelligence). Then God, in the form of that great essence, created the ego (composite ego). 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)