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mahabharat 12.182.10: जब भरद्वाज मुनि ने इस प्रकार अपना संदेह पूछा, तब ब्रह्माजी के समान तेजस्वी ऋषि भगवान भृगुन ने उन्हें सब कुछ बता दिया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.182.10 
एवं स भगवान् पृष्टो भरद्वाजेन संशयम्।
ब्रह्मर्षिर्ब्रह्मसंकाश: सर्वं तस्मै ततोऽब्रवीत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब भरद्वाज मुनि ने इस प्रकार अपना संदेह पूछा, तब ब्रह्माजी के समान तेजस्वी ऋषि भगवान भृगुन ने उन्हें सब कुछ बता दिया॥10॥
 
When Bhardwaj Muni asked his doubts in this way, Lord Bhrigun, a brilliant sage like Brahmaji, told him everything. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)