Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.181.8-9: मनुष्य ने जो भी कर्म किया है, वह उसका पीछा करता रहता है। यदि कर्ता तेजी से दौड़ता है, तो वह भी उसी गति से उसका पीछा करता है। जब वह सोता है, तो उसके कर्मों का फल भी उसके साथ सो जाता है। जब वह खड़ा होता है, तो वह भी पास में खड़ा रहता है और जब कोई व्यक्ति चलता है, तो वह भी उसके पीछे चलने लगता है। इतना ही नहीं, कोई भी कर्म करते समय भी कर्म का संस्कार उसका साथ नहीं छोड़ता। वह छाया की तरह सदैव उसका पीछा करता रहता है ॥8-9॥ | mahabharat अध्याय 12.181: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य ने जो भी कर्म किया है, वह उसका पीछा करता रहता है। यदि कर्ता तेजी से दौड़ता है, तो वह भी उसी गति से उसका पीछा करता है। जब वह सोता है, तो उसके कर्मों का फल भी उसके साथ सो जाता है। जब वह खड़ा होता है, तो वह भी पास में खड़ा रहता है और जब कोई व्यक्ति चलता है, तो वह भी उसके पीछे चलने लगता है। इतना ही नहीं, कोई भी कर्म करते समय भी कर्म का संस्कार उसका साथ नहीं छोड़ता। वह छाया की तरह सदैव उसका पीछा करता रहता है ॥8-9॥
Whatever deed a person has done, it keeps following him. If the doer runs fast, he also follows him with the same speed. When he sleeps, the result of his deeds also sleeps with him. When he stands, he also stands nearby and when a person walks, he also starts walking behind him. Not only this, even while doing any work, the sanskar of karma does not leave him. It always follows him like a shadow. ॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥