Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.181.6: जो भगवान् की पूजा और आतिथ्य में प्रिय हैं, जो उदार हैं और जो श्रेष्ठ पुरुषों को पसन्द करते हैं, वे पुण्यात्मा पुरुष उस मार्ग पर चलते हैं जो उनके दाहिने हाथ के समान शुभ है और जो केवल मन को वश में करने वाले योगियों को ही प्राप्त हो सकता है ॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.181: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो भगवान् की पूजा और आतिथ्य में प्रिय हैं, जो उदार हैं और जो श्रेष्ठ पुरुषों को पसन्द करते हैं, वे पुण्यात्मा पुरुष उस मार्ग पर चलते हैं जो उनके दाहिने हाथ के समान शुभ है और जो केवल मन को वश में करने वाले योगियों को ही प्राप्त हो सकता है ॥6॥
Those who love the worship of God and hospitality, who are generous and who like noble men, those virtuous men embark on the path that is as auspicious as their right hand and is attainable only to the yogis who have control over their minds. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥