Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.181.2: भीष्म बोले, "हे राजन! काम, क्रोध आदि विकारों से युक्त बुद्धि के कारण ही मन पापकर्मों की ओर प्रवृत्त होता है। इस प्रकार मनुष्य अपने ही कर्मों द्वारा पाप करता है और दुःखों के लोक (नरक) में गिराया जाता है॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 12.181: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म बोले, "हे राजन! काम, क्रोध आदि विकारों से युक्त बुद्धि के कारण ही मन पापकर्मों की ओर प्रवृत्त होता है। इस प्रकार मनुष्य अपने ही कर्मों द्वारा पाप करता है और दुःखों के लोक (नरक) में गिराया जाता है॥ 2॥
Bhishma said, "O King! The mind is inclined towards sinful acts due to the intellect which is full of vices like lust, anger etc. In this way, man commits sins through his own actions and is thrown into the world of sorrows (hell).॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥