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mahabharat 12.181.15: चाहे वह बालक हो, युवा हो या वृद्ध, वह जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उसे उन कर्मों का फल अगले जन्म में उसी आयु में प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 12.181: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 181: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.181.15 
बालो युवा च वृद्धश्च यत् करोति शुभाशुभम्।
तस्यां तस्यामवस्थायां तत् फलं प्रतिपद्यते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
चाहे वह बालक हो, युवा हो या वृद्ध, वह जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उसे उन कर्मों का फल अगले जन्म में उसी आयु में प्राप्त होता है।
 
Be it a child, a young person or an old person, whatever good or bad deeds he performs, he receives the fruits of those deeds in the same age in his next birth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)