श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 180: सद्‍बुद्धिका आश्रय लेकर आत्महत्यादि पापकर्मसे निवृत्त होनेके सम्बन्धमें काश्यप ब्राह्मण और इन्द्रका संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.180.20 
इमे मां कृमयोऽदन्ति येषामुद्धरणाय वै।
नास्ति शक्तिरपाणित्वात् पश्यावस्थामिमां मम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ये कीड़े मुझे खा रहे हैं और मुझमें इन्हें बाहर निकालने की शक्ति नहीं है। हाथ न होने के कारण मैं कितनी दुर्दशा में हूँ, यह आप स्वयं देख सकते हैं॥20॥
 
‘These insects are eating me and I do not have the strength to throw them out. You can see for yourself the misery I am in due to not having hands.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)