श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 180: सद्‍बुद्धिका आश्रय लेकर आत्महत्यादि पापकर्मसे निवृत्त होनेके सम्बन्धमें काश्यप ब्राह्मण और इन्द्रका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.180.2 
भीष्म उवाच
प्रज्ञा प्रतिष्ठा भूतानां प्रज्ञा लाभ: परो मत:।
प्रज्ञा नि:श्रेयसी लोके प्रज्ञा स्वर्गो मत: सताम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले- राजन! जीवों का मुख्य आश्रय बुद्धि है। बुद्धि ही उनका सबसे बड़ा उपकार है। इस संसार में बुद्धि ही उनका कल्याण करती है। सत्पुरुषों के मत में बुद्धि ही स्वर्ग है॥ 2॥
 
Bhishmaji said- King! The main refuge of living beings is intelligence. Intelligence is their biggest benefit. In this world, intelligence is the only thing that brings them welfare. In the opinion of good men, intelligence is heaven.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)