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mahabharat 12.18.40: इसी प्रकार यदि हम देवताओं, अतिथियों और समस्त प्राणियों को उचित रीति से अपना-अपना भाग अर्पित करें तथा ब्राह्मणों के प्रति समर्पित एवं सत्यनिष्ठ रहें, तो हमें अवश्य ही इच्छित स्थान की प्राप्ति होगी ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.18.40 
देवतातिथिभूतानां निर्वपन्तो यथाविधि।
स्थानमिष्टमवाप्स्यामो ब्रह्मण्या: सत्यवादिन:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार यदि हम देवताओं, अतिथियों और समस्त प्राणियों को उचित रीति से अपना-अपना भाग अर्पित करें तथा ब्राह्मणों के प्रति समर्पित एवं सत्यनिष्ठ रहें, तो हमें अवश्य ही इच्छित स्थान की प्राप्ति होगी ॥40॥
 
In the same way, if we offer our share to the gods, guests and all living beings in a proper manner and remain devoted to Brahmins and truthful, then we will certainly attain the desired place. ॥ 40॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि अर्जुनवाक्ये अष्टादशोऽध्याय:॥ १८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें अर्जुनका वाक्यविषयक अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)