Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.18.34: यदि हृदय का राग (आसक्ति) दूर न हुआ हो, तो भगवा वस्त्र धारण करना केवल स्वार्थसिद्धि के लिए ही करना समझना चाहिए। मेरा मानना है कि जो धार्मिक होने का दिखावा करते हैं, उनके लिए यह केवल जीविकोपार्जन का व्यवसाय है।॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 12.18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनिष्कषाये काषायमीहार्थमिति विद्धि तम्।
धर्मध्वजानां मुण्डानां वृत्यर्थमिति मे मिति:॥ ३४॥
अनुवाद
यदि हृदय का राग (आसक्ति) दूर न हुआ हो, तो भगवा वस्त्र धारण करना केवल स्वार्थसिद्धि के लिए ही करना समझना चाहिए। मेरा मानना है कि जो धार्मिक होने का दिखावा करते हैं, उनके लिए यह केवल जीविकोपार्जन का व्यवसाय है।॥ 34॥
‘If the passion (attachment) of the heart has not been removed, then wearing saffron clothes should be understood to be done only for selfish ends. I believe that for the religious people who pretend to be religious, this is just a business to earn a living.॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥