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mahabharat 12.18.23: जो मनुष्य दरिद्र, मित्रों द्वारा त्यागा हुआ, दरिद्र और केवल सुख चाहने वाला है, उसी प्रकार जो सब प्रकार से सम्पन्न देवी लक्ष्मी को त्याग देता है, उसे क्या लाभ होता है?॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.18.23 
श्रिया विहीनैरधनैस्त्यक्तमित्रैरकिंचनै:।
सौखिकै: सम्भृतानर्थान् य: संत्यजति किं नु तत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दरिद्र, मित्रों द्वारा त्यागा हुआ, दरिद्र और केवल सुख चाहने वाला है, उसी प्रकार जो सब प्रकार से सम्पन्न देवी लक्ष्मी को त्याग देता है, उसे क्या लाभ होता है?॥ 23॥
 
'What does one gain from a person who abandons the goddess Lakshmi, who is full of all kinds, like a person who is poor, forsaken by his friends, destitute and who desires only happiness?॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)