Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.18.21: यदि यहाँ मुट्ठी भर जौ की भी आवश्यकता रह गई, तो जो वचन तुमने सब कुछ त्यागने का दिया था, वह नष्ट हो जाएगा। (सब कुछ त्यागकर) मैं तुम्हारा कौन हूँ और तुम मेरे कौन हो और मुझ पर तुम्हारी क्या कृपा है?॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 12.18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धानामुष्टेरिहार्थश्चेत् प्रतिज्ञा ते विनश्यति।
का वाहं तव को मे त्वं कश्च ते मय्यनुग्रह:॥ २१॥
अनुवाद
यदि यहाँ मुट्ठी भर जौ की भी आवश्यकता रह गई, तो जो वचन तुमने सब कुछ त्यागने का दिया था, वह नष्ट हो जाएगा। (सब कुछ त्यागकर) मैं तुम्हारा कौन हूँ और तुम मेरे कौन हो और मुझ पर तुम्हारी क्या कृपा है?॥ 21॥
‘If the need for a handful of barley remains here, then the promise you made to renounce everything will be ruined. (After renouncing everything) Who am I to you and who are you to me and what is your favour upon me?॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥