Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.18.13: ये क्षत्रिय जो धर्म की इच्छा रखते हैं और सदैव आपकी सेवा में तत्पर रहते हैं, आपसे बड़ी आशा रखते हैं; ये बेचारे अपनी सेवा का फल चाहते हैं॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अमी च धर्मकामास्त्वां क्षत्रिया: पर्युपासते।
त्वदाशामभिकांक्षन्त: कृपणा: फलहेतुका:॥ १३॥
अनुवाद
ये क्षत्रिय जो धर्म की इच्छा रखते हैं और सदैव आपकी सेवा में तत्पर रहते हैं, आपसे बड़ी आशा रखते हैं; ये बेचारे अपनी सेवा का फल चाहते हैं॥13॥
'These kshatriyas who desire Dharma and are always in your service, have great expectations from you; these poor ones want the fruits of their service.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥