Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.179.24: यदि संयोगवश मुझे कोई धर्म-सम्मत भोग-वस्तु मिल जाए, तो मैं उससे द्वेष नहीं करता और यदि वह न मिले, तो दुर्लभ भोग की भी मैं इच्छा नहीं करता॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 12.179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न संनिपतितं धर्म्यमुपभोगं यदृच्छया।
प्रत्याचक्षे न चाप्येनमनुरुध्ये सुदुर्लभम्॥ २४॥
अनुवाद
यदि संयोगवश मुझे कोई धर्म-सम्मत भोग-वस्तु मिल जाए, तो मैं उससे द्वेष नहीं करता और यदि वह न मिले, तो दुर्लभ भोग की भी मैं इच्छा नहीं करता॥ 24॥
'If by chance I get some object of enjoyment that is in accordance with the Dharma, I do not hate it. And if I do not get it, I do not desire even a rare enjoyment.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥