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mahabharat 12.179.23: कभी मैं चिथड़े या छाल पहनता हूँ, कभी भांग का, कभी रेशम का और कभी मृगचर्म का। कभी-कभी तो मैं बहुत से बहुमूल्य वस्त्र भी पहनता हूँ॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.179.23 
धारयामि च चीराणि शाणक्षौमाजिनानि च।
महार्हाणि च वासांसि धारयाम्यहमेकदा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कभी मैं चिथड़े या छाल पहनता हूँ, कभी भांग का, कभी रेशम का और कभी मृगचर्म का। कभी-कभी तो मैं बहुत से बहुमूल्य वस्त्र भी पहनता हूँ॥ 23॥
 
‘Sometimes I wear rags or bark, sometimes of hemp, sometimes of silk and sometimes of deerskin. At one time I even wear many costly garments.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)