Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.179.21: कभी चावल का माड़ खाता हूँ, कभी केवल तिल की खली खाता हूँ और कभी पके हुए चावल का पूरा भोजन करता हूँ। इस प्रकार मुझे अच्छे-बुरे सभी प्रकार के भोजन बार-बार मिलते रहते हैं॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 12.179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कभी चावल का माड़ खाता हूँ, कभी केवल तिल की खली खाता हूँ और कभी पके हुए चावल का पूरा भोजन करता हूँ। इस प्रकार मुझे अच्छे-बुरे सभी प्रकार के भोजन बार-बार मिलते रहते हैं॥ 21॥
‘Sometimes I eat rice bran, sometimes I eat only sesame seed cake and sometimes I eat full meal of cooked rice. In this way I keep getting all kinds of food, good and bad, again and again.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥