Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.179.2: भीष्मजी कहते हैं - राजन् ! इस विषय में भी प्राचीन इतिहास से एक उदाहरण दिया जाता है, जो प्रह्लाद और अजगर रूप में रहने वाले एक साधु के संवाद के रूप में दिया गया है ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.179.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
प्रह्रादस्य च संवादं मुनेराजगरस्य च॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन् ! इस विषय में भी प्राचीन इतिहास से एक उदाहरण दिया जाता है, जो प्रह्लाद और अजगर रूप में रहने वाले एक साधु के संवाद के रूप में दिया गया है ॥2॥
 
Bhishmaji says – King! In this matter also, an example from ancient history is given in the form of a dialogue between Prahlad and a monk living in python form. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)