श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 178: जनककी उक्ति तथा राजा नहुषके प्रश्नोंके उत्तरमें बोध्यगीता  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.178.7 
पिङ्गला कुरर: सर्प: सारङ्गान्वेषणं वने।
इषुकार: कुमारी च षडेते गुरवो मम॥ ७॥
 
 
अनुवाद
पिंगला, कुरार पक्षी, सर्प, वन में बाँसुरी की खोज करने वाला, बाण बनाने वाला और कुमारी कन्या- ये छह मेरे गुरु हैं ॥7॥
 
Pingala, the Kurar bird, the snake, the search for a flute in the forest, the arrow maker and the virgin girl—these six are my gurus. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)