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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 178: जनककी उक्ति तथा राजा नहुषके प्रश्नोंके उत्तरमें बोध्यगीता
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श्लोक 3
श्लोक
12.178.3
अत्रैवोदाहरन्तीमं बोध्यस्य पदसंचयम्।
निर्वेदं प्रति विन्यस्तं तं निबोध युधिष्ठिर॥ ३॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! इस प्रसंग में मैं तुम्हें बोध्य मुनि द्वारा वैराग्य हेतु कहे गए वचन सुनाता हूँ। सुनो।
Yudhishthira! In this context I shall tell you the words spoken by Bodhya Muni with the aim of detachment. Listen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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