श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 178: जनककी उक्ति तथा राजा नहुषके प्रश्नोंके उत्तरमें बोध्यगीता  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.178.2 
अनन्तमिव मे वित्तं यस्य मे नास्ति किञ्चन।
मिथिलायां प्रदीप्तायां न मे दह्यति किञ्चन॥ २॥
 
 
अनुवाद
[जनक ने कहा -] मेरे पास अपार धन और वैभव है; फिर भी मेरे पास कुछ भी नहीं है। यदि यह मिथिला नगरी आग भी पकड़ ले, तो भी मेरा कुछ भी नहीं जलेगा॥ 2॥
 
[Janaka said -] I have infinite wealth and splendor; yet I have nothing. Even if this Mithila city catches fire, nothing of mine will burn.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)