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mahabharat 12.178.13: यदि बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तो उनमें प्रतिदिन झगड़ा होता है और यदि दो लोग भी एक साथ रहते हैं, तो उनमें बातचीत अवश्य होती है; इसलिए मैं कुंवारी कन्या के हाथ में पहनी हुई शंखचूड़ की भाँति अकेला ही विचरण करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 12.178: जनककी उक्ति तथा राजा नहुषके प्रश्नोंके उत्तरमें बोध्यगीता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 178: जनककी उक्ति तथा राजा नहुषके प्रश्नोंके उत्तरमें बोध्यगीता  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.178.13 
बहूनां कलहो नित्यं द्वयो: संकथनं ध्रुवम्।
एकाकी विचरिष्यामि कुमारीशंखको यथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यदि बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तो उनमें प्रतिदिन झगड़ा होता है और यदि दो लोग भी एक साथ रहते हैं, तो उनमें बातचीत अवश्य होती है; इसलिए मैं कुंवारी कन्या के हाथ में पहनी हुई शंखचूड़ की भाँति अकेला ही विचरण करूँगा।
 
If many people live together, there is quarrel among them every day. And even if two people live together, there is certainly conversation between them; hence I shall wander alone like a single conch-shell bangle worn on the hand of a virgin girl.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि बोध्यगीतायां अष्टसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें बोध्यगीताविषयक एक सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)