श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 178: जनककी उक्ति तथा राजा नहुषके प्रश्नोंके उत्तरमें बोध्यगीता  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.178.1 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
गीतं विदेहराजेन जनकेन प्रशाम्यता॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! उसी विषय में प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया जा रहा है, जिसमें शान्तचित्त विदेह राजा जनक ने अपना भाव प्रकट किया था॥1॥
 
Bhishma says - O King! An example of the ancient history is being given regarding the same matter in which Videha King Janaka, who had attained a peaceful mind, had expressed his sentiments. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)