श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.177.54 
दम्यनाशकृते मङ्किरमृतत्वं किलागमत् ।
अच्छिनत् काममूलं स तेन प्राप महत्सुखम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
बछड़ों के विनाश को साधन बनाकर ही मुनियों ने अमरत्व प्राप्त किया। उन्होंने कामरूपी जड़ को काट डाला; इसीलिए मुझे महान सुख प्राप्त हुआ ॥54॥
 
The monks attained immortality only by making the destruction of calves an instrument. They cut off the root of lust; That is why I attained great happiness. 54॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि मङ्किगीतायां सप्तसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें मङ्किगीताविषयक एक सौ सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)