बछड़ों के विनाश को साधन बनाकर ही मुनियों ने अमरत्व प्राप्त किया। उन्होंने कामरूपी जड़ को काट डाला; इसीलिए मुझे महान सुख प्राप्त हुआ ॥54॥
The monks attained immortality only by making the destruction of calves an instrument. They cut off the root of lust; That is why I attained great happiness. 54॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि मङ्किगीतायां सप्तसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें मङ्किगीताविषयक एक सौ सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥