Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.177.52: काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर और ममता - ये देहधारियों के सात शत्रु हैं। इनमें कामरूपी सातवाँ शत्रु सबसे प्रबल है। इस महाशत्रु काम को इन सब सहित नष्ट करके मैं अविनाशी ब्रह्मपुर में निवास करूँगा और राजा के समान सुखी रहूँगा।॥ 52॥ | mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर और ममता - ये देहधारियों के सात शत्रु हैं। इनमें कामरूपी सातवाँ शत्रु सबसे प्रबल है। इस महाशत्रु काम को इन सब सहित नष्ट करके मैं अविनाशी ब्रह्मपुर में निवास करूँगा और राजा के समान सुखी रहूँगा।॥ 52॥
‘Lust, anger, greed, delusion, pride, envy and affection—these are the seven enemies of embodied beings. Of these, the seventh enemy in the form of lust is the strongest. After destroying this great enemy lust along with all of them, I will reside in the indestructible Brahmapur and be happy like a king.’॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥